19 मार्च 2011 - 20:30
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इमाम मोहम्मद बाक़िर अलै. का संक्षिप्त जीवन परिचय

नाम : मोहम्मद इब्ने अली इब्ने हुसैन अलै.

वालिद: अली इब्ने हुसैन अलै. (इमाम सज्जाद)

वालिदा: फ़ातेमा बिन्ते हसन अलै.

विलादत: 1 रजब 57 हिजरी

शहादत: 7 ज़िलहिज्जा 114 हिजरी

मुद्दते इमामत: 19 साल (95हि. से 114हि.)

इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. का जन्म पहली रजब सन् 57 हिजरी को मदीनए मुनव्वरा में हुआ। आप “इमाम मुहम्मद बाक़िर” और “बाक़िरुल उलूम” के नाम से मशहूर हैं।

इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. लगभग 4 साल अपने दादा इमाम हुसैन अलै. और लगभग 38 साल अपने बाबा इमामे ज़ैनुल आबेदीन अलै. के साथ रहे। अपने बाबा की शहादत के बाद आपने सन् 95 हिजरी क़मरी से लेकर 19 साल तक इमामत के  फ़राएज़ अंजाम दिए । आप कर्बला के वाक़ए में भी मौजूद थे उस समय आपकी उम्र 4 साल थी और इसी तरह उसके बाद अपने बाबा के साथ कूफ़ा और शाम भी गए इसी वजह से जब आपके सामने कूफ़ा व शाम का नाम आता था तो आप रोने लगते थे और फ़रमाते थे कि हम वह मंज़र कभी नहीं भूलेंगे।

अपकी वालिदा का नाम फ़ातिमा था जो इमाम हसन अलै. की बेटी थीं और उम्मे अब्दुल्लाह के नाम से मशहूर थीं इस तरह इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. दोनो तरफ़ से अमीरुलमोमेनीन अली अलै. और हज़रत फ़तिमा ज़हरा सअ. के पोते और नवासे थे इसी वजह से आपको “इब्नुल ख़ैरतैन” और “अलवी बैने अलवीयैन” कहा जाता था और यह फ़ज़ीलत सिर्फ़ आपको मिली है।

इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. की हुकूमत से पहले मुआविया इब्ने अबी सुफ़यान, यज़ीद इब्ने मुआविया, मुआविया इब्ने यज़ीद, अब्दुल्लाह इब्ने ज़ुबैर, मरवान बिन हकम, अब्दुल मलिक इब्ने मरवान, वलीद इब्ने अब्दुल मलिक जैसे लोग हाकिम थे और आपकी इमामत के बाद सुलैमान इब्ने अब्दुल मलिक, उमर इब्ने अब्दुल अज़ीज़, यज़ीद इब्ने अब्दुल मलिक और हश्शाम इब्ने अब्दुल मलिक जैसे लोग थे इस दौरान इमाम अलै. को बहुत सख़्तियों और दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।

आख़िरकार यह हुआ कि हश्शाम इब्ने अब्दुल मलिक के कहने पर इब्राहीम इब्ने वलीद ने आपको ज़हर दिया और आप 7 ज़िलहिज्जा 114 हिजरी में शहीद कर दिए गए।

आपको अपने बाबा इमामे सज्जाद अलै. और दादा इमामे हसन अलै. के साथ मदीने में जन्नतुलबक़ी क़ब्रिस्तान में दफ़्न कर दिया गया।

 

 

  

इमाम मोहम्मद बाक़िर अलै. का संक्षिप्त जीवन परिचय

नाम : मोहम्मद इब्ने अली इब्ने हुसैन अलै.

वालिद: अली इब्ने हुसैन अलै. (इमाम सज्जाद)

वालिदा: फ़ातेमा बिन्ते हसन अलै.

विलादत: 1 रजब 57 हिजरी

शहादत: 7 ज़िलहिज्जा 114 हिजरी

मुद्दते इमामत: 19 साल (95हि. से 114हि.)

इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. का जन्म पहली रजब सन् 57 हिजरी को मदीनए मुनव्वरा में हुआ। आप “इमाम मुहम्मद बाक़िर” और “बाक़िरुल उलूम” के नाम से मशहूर हैं।

इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. लगभग 4 साल अपने दादा इमाम हुसैन अलै. और लगभग 38 साल अपने बाबा इमामे ज़ैनुल आबेदीन अलै. के साथ रहे। अपने बाबा की शहादत के बाद आपने सन् 95 हिजरी क़मरी से लेकर 19 साल तक इमामत के  फ़राएज़ अंजाम दिए । आप कर्बला के वाक़ए में भी मौजूद थे उस समय आपकी उम्र 4 साल थी और इसी तरह उसके बाद अपने बाबा के साथ कूफ़ा और शाम भी गए इसी वजह से जब आपके सामने कूफ़ा व शाम का नाम आता था तो आप रोने लगते थे और फ़रमाते थे कि हम वह मंज़र कभी नहीं भूलेंगे।

अपकी वालिदा का नाम फ़ातिमा था जो इमाम हसन अलै. की बेटी थीं और उम्मे अब्दुल्लाह के नाम से मशहूर थीं इस तरह इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. दोनो तरफ़ से अमीरुलमोमेनीन अली अलै. और हज़रत फ़तिमा ज़हरा सअ. के पोते और नवासे थे इसी वजह से आपको “इब्नुल ख़ैरतैन” और “अलवी बैने अलवीयैन” कहा जाता था और यह फ़ज़ीलत सिर्फ़ आपको मिली है।

इमामे मुहम्मद बाक़िर अलै. की हुकूमत से पहले मुआविया इब्ने अबी सुफ़यान, यज़ीद इब्ने मुआविया, मुआविया इब्ने यज़ीद, अब्दुल्लाह इब्ने ज़ुबैर, मरवान बिन हकम, अब्दुल मलिक इब्ने मरवान, वलीद इब्ने अब्दुल मलिक जैसे लोग हाकिम थे और आपकी इमामत के बाद सुलैमान इब्ने अब्दुल मलिक, उमर इब्ने अब्दुल अज़ीज़, यज़ीद इब्ने अब्दुल मलिक और हश्शाम इब्ने अब्दुल मलिक जैसे लोग थे इस दौरान इमाम अलै. को बहुत सख़्तियों और दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।

आख़िरकार यह हुआ कि हश्शाम इब्ने अब्दुल मलिक के कहने पर इब्राहीम इब्ने वलीद ने आपको ज़हर दिया और आप 7 ज़िलहिज्जा 114 हिजरी में शहीद कर दिए गए।

आपको अपने बाबा इमामे सज्जाद अलै. और दादा इमामे हसन अलै. के साथ मदीने में जन्नतुलबक़ी क़ब्रिस्तान में दफ़्न कर दिया गया।